आलोट विधायक डाॅ. मालवीय के बयान से मचा तहलका, बोले आईएएस अफसरों ने सरकार को कॉर्पोरेट संस्था बना दी, नेता-मंत्रियों को भी तवज्जो नहीं दे रहे
रतलाम में पूर्व गृहमंत्री के एसपी ऑफिस में व जिपं अध्यक्ष के कलेक्टर ऑफिस में धरने और मंदसौर में नपाध्यक्ष को इंतजार कराने का जिक्र किया
मध्य प्रदेश/रतलाम. मध्य प्रदेश की राजनीति और प्रशासनिक महकमे के साथ ही सत्ता और संगठन में 31 मई 2026 को उस वक्त तहलका मच गया जब आलोट से भाजपा के वरिष्ठ विधायक और पूर्व सांसद रहे डॉक्टर चिंतामणि मालवीय का आईएएस और आईपीएस अफसरों को लेकर एक बड़ा बयान सोशल मीडिया पर सामने आया।
आलोट विधायक ने अपने यूट्यूब चैनल पर लाइव आकर सबसे पहले तो रतलाम, मंदसौर के तीन चार घटनाक्रम का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि मंदसौर नगर पालिका अध्यक्ष रमादेवी गुर्जर भाजपा जिला अध्यक्ष सहित अन्य नेताओं के साथ कलेक्टर से मिलने पहुंचीं तो उन्हें घंटे भर इंतजार करवाया गया। रतलाम में भी जिला पंचायत अध्यक्ष लाला बाई चंद्रवंशी और उनके पति शंभू लाल कलेक्टर से मिलने दिनभर बाहर सीढियों पर बैठे रहे लेकिन कलेक्टर नहीं मिलीं। फिर भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व गृह मंत्री हिम्मत कोठारी को एक वाजिब मांग के लिए एसपी कार्यालय में फर्श पर बैठना पड़ा। और भिंड के एक विधायक के साथ वहां के कलेक्टर की बहसबाजी का भी विधायक डॉ मालवीय ने जिक्र किया है। वैसे उनका यह दर्द इसलिए भी झलका क्योंकि वह भी जावरा उज्जैन ग्रीनफील्ड फोरलेन प्रभावित किसानों को उचित मुआवजा दिलाने की मांग को लेकर किसानों के साथ रतलाम कलेक्टर ऑफिस गए थे तो उन्हें भी कुछ देर इंतजार करना पड़ गया था। खैर इन सभी घटनाक्रम के बहाने विधायक मालवीय ने कहा कि आईएएस व आईपीएस अफसरों को जरूर से ज्यादा अधिकार सरकार ने दे दिए है। इसके कारण यह संगठन मजबूत हो गया और सरकार के मंत्री और नेताओं को ही अफसर तवज्जो नहीं देते हैं। लोकतांत्रिक व्यवस्था में सरकार की शक्ति जनता में होती है लेकिन व्यवहारिकता में ना जनप्रतिनिधियों के पास है और ना ही सरकार के पास। सारी शक्ति तो इन अफसरों के पास है। उन्होंने केंद्रीय ढांचे में प्रशासनिक व्यवस्था की तारीफ करते हुए कहा कि मैं सांसद रहा तो वहां पर अच्छी व्यवस्था है। लेकिन राज्यों में अफसर ही हावी है और आईएएस अफसरों ने मिलकर सरकार को एक तरह से कॉर्पोरेट संस्था बना दिया है, जहां अफसरों के लिए दंड की कोई व्यवस्था नहीं है। इसलिए राज्यों में प्रशासनिक पदों के रिस्ट्रक्चर और जिम्मेदारियां के सही विभाजन की आवश्यकता महसूस हो रही है। विधायक ने भोपाल में विभिन्न आईएएस आईपीएस अफसरों द्वारा जमीनों की खरीदी करके वहां नए प्रोजेक्ट लाकर उन जमीनों के भाव बढ़ाने जैसे गंभीर आरोप भी लगा दिए है। बल्कि विधायक ने अपने वीडियो में कई प्रमुख सचिव रहे और अन्य अफसरों के नाम तक लिए हैं। इस पूरे बयान के बाद प्रदेश ही नहीं बल्कि केंद्र स्तर की राजनीति में भूचाल आया हुआ है।