जावरा : पार्षद परिषद हाल में ही धरने पर बैठीं, डोर टू डोर कचरा नहीं उठने पर भी मचा हंगामा

जावरा नगर पालिका सम्मेलन में पक्ष और विपक्ष दोनों के पार्षदों ने उठाए सवाल

जावरा : पार्षद परिषद हाल में ही धरने पर बैठीं, डोर टू डोर कचरा नहीं उठने पर भी मचा हंगामा

जावरा. नगर पालिका परिषद का साधारण सम्मेलन 24 अक्टूबर 2025 को हुआ। इसमें नामांतरण के 74 प्रकरण रखे गए थे। इनमें से करीब 10 से अधिक नामांतरण पर भाजपा के पार्षदों ने आपत्ति ली। इसमें एक दो धार्मिक भवनों से संबंधित भी थे। वही आत्मनिर्भर भारत व एक राष्ट्र एक चुनाव और जीएसटी कटौती के समर्थन में प्रस्ताव अनुमोदित करके शासन को भेजने का निर्णय लिया।

                इस सम्मेलन में विकास से जुड़े तो ज्यादा मुद्दे नहीं थे लेकिन सफाई व्यवस्था और कुछ वार्डों में काम नहीं होने से पार्षद नाराज दिखाई दिए। कांग्रेस की वार्ड 21 की पार्षद रशीदा बी तो परिषद हाल में ही फर्श पर धरने पर बैठ गई। उनका आरोप था कि हमारे वार्ड में काम नहीं हो रहे और जो जानकारी हम मांगते हैं वह नहीं दी जा रही है। इधर नगर पालिका अध्यक्ष अनम मोहम्मद यूसुफ कड़पा का कहना था कि उनके वार्ड में करीब 4 करोड़ के काम हो चुके हैं और कई और कार्य स्वीकृत हो गए हैं। जल्द शुरू होंगे। इसके बाद भी झूठे आरोप लगाकर धरना देना अनुशासनहीनता है। उपाध्यक्ष सुशील कोचट्टा, विधायक प्रतिनिधि अजय सिंह भाटी सहित अन्य जनप्रतिनिधियों ने मिलकर पार्षद रशीदा बी को फर्श से मनाकर उठाया। हालांकि वे वहां से चली गई।

 इधर नपा सम्मेलन में सफाई व्यवस्था को लेकर भी खूब हंगामा हुआ। विधायक प्रतिनिधि ने कहा कि डोर टू डोर कचरा कलेक्शन करने वाली गाड़ियां 3 से 4 दिन तक नहीं आ रही है। यह मुद्दे हमने पिछली बैठक में भी उठाए थे लेकिन संबंधित विभाग के जिम्मेदार बिल्कुल ध्यान नहीं दे रहे हैं। नगर पालिका अध्यक्ष अनम कडपा ने भी व्यवस्था सही नहीं होने की बात मानी और स्वास्थ्य विभाग के इंचार्ज को सुधार के निर्देश दिए। वहीं नामांतरण पर आपत्ती प्रोसिडिंग में शामिल नहीं करने से नाराज पार्षदों ने सीएमओ कार्यालय में पहुंचकर उन्हें लिखित आपत्ति दी और जो प्रकरण बताए उनका नामांतरण रोकने की मांग की। इसके आधार पर मुख्य नगर पालिका अधिकारी राहुल शर्मा ने जांच उपरांत कार्रवाई का आश्वासन दिया।

            वैसे नगर में चर्चा है कि नगर पालिका में नामांतरण के हाल राजस्व से भी बुरे हैं। कुछ पार्षद अपने हित के लिए बिना काम कि आपत्तियां लगाकर नामांतरण रूकवाते हैं और फिर जिसकी संपत्ति है उससे संपर्क साधने का प्रयास भी किया जाता है। पिछले कई सम्मेलनों से यह स्थिति देखने को मिल रही है। ऐसे में जिम्मेदारों को ध्यान देने और नियमानुसार सारे दस्तावेज चेक करने के बाद ही नामांतरण करने की आवश्यकता है।

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